
बाराँ शब्द वाराह शब्द का अपभ्रंश है गुप्तकाल मे भगवान विष्णु वाराह अवतार अपनी प्रतिष्ठा के सर्वोच्च शिखर पर था ,उस कल मे भगवान वाराह की मूर्तिया पूरे भारत भूमि पर स्थापित की गई ! प्रतिहारों के काल मे भी सम्पूर्ण उत्तरी भारत मे भगवान वाराह की मूर्तिया स्थापित की गई ! इस नगर से भगवान वाराह की मूर्तिया बहुत अधिक संख्या मे मिली है ! अतः यह अनुमान लगाया गया है की इस जगह का नाम वाराह था जो कालांतर मे आते आते बाराँ हो गया ! यह भी माना जाता है कि इस क्षेत्र मे 12 गाँव आते थे इसलिए इसे बाराँ कहा जाता है !
यहाँ राजस्थान के सर्वाधिक सुरक्षित वन पाए जाते है ! परवन व पार्वती नामक नदियाँ प्रवाहित होती है ! इस जिले मे फसलों की अच्छी पैदावार होती है ! परवन नदी के पास ही यहाँ शेरगढ़ अभयारण्य है जिसे सांपों की शरण स्थली कहा जाता है
महत्त्वपूर्ण जानकारी :-
प्रशासनिक और राजनैतिक दृष्टि से देखे तो इस जिले मे 5 नगरपालिका(बाराँ,अंता,छबड़ा,मंगरोलऔरअटरू), 6उपखंड(बाराँ,मंगरोल,अटरू,किशनगंज,शाहबाद,एवं छबड़ा ) और 8 तहसीले ( अंता, बाराँ,मंगरोल,अटरू,किशनगंज,शाहबा द,छबड़ा,एव छिपबड़ोंद ) है !
इस जिले मे 4 विधानसभा क्षेत्र आते है ( बाराँ-अटरू,अंता,किशनगंज और छबड़ा ) जबकि यह सम्पूर्ण क्षेत्र ( चारों विधानसभा ) झालावाड़-बाराँ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है ! कोटा जिला इसके पश्चिम मे है ,इसके दक्षिण मे झालावाड़ जिला आता है जबकि उत्तर-पूर्व , दक्षिण-पूर्व मे मध्यप्रदेश राज्य है !
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य-
क्षेत्रफल – 6992
साक्षरता दर -67.38
लिंगनुपात – 926/1000
जनसंख्या घनत्व – 170 वर्ग किलोमीटर
आधिकारिक वेबसाइट – baran.rajasthan.gov.in

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